जहन से मलालों का मुखोटा उतार
कभी तो बेतकल्लुफ़ हो लेना
परिचित इन रास्तों को रुख़सत किये
कोई नामालूम रास्ता अपना लेना ।।
तुम्हारी ही तरह विरले से राही मिलेंगे इस पथ पर
अपने अहम से परे किसी राहगीर की रहनुमाई कर देना।।
कहीं छत ना मिले तो अफसोस ना करना
ज़मीं आसमां को तुम अपना पासवान बना लेना
भटक कहीं जाओ भी
इन हवाओं से दिशा पूछ लेना ।।
मुराद अपनी ना भूलकर
संजोई उस ताबीर को सच झुठला देना
बडी़ पहचानों भरी दुनिया में
एक छोटी सी पहचान बना लेना ।।
कभी तो बेतकल्लुफ़ हो लेना
परिचित इन रास्तों को रुख़सत किये
कोई नामालूम रास्ता अपना लेना ।।
तुम्हारी ही तरह विरले से राही मिलेंगे इस पथ पर
अपने अहम से परे किसी राहगीर की रहनुमाई कर देना।।
कहीं छत ना मिले तो अफसोस ना करना
ज़मीं आसमां को तुम अपना पासवान बना लेना
भटक कहीं जाओ भी
इन हवाओं से दिशा पूछ लेना ।।
मुराद अपनी ना भूलकर
संजोई उस ताबीर को सच झुठला देना
बडी़ पहचानों भरी दुनिया में
एक छोटी सी पहचान बना लेना ।।
Wow ...just wow❤️...
ReplyDeleteYour choice of words and the flow, both wrew nicely done...
Thanks alot 😊
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