टूटे हैं ख़्वाब अभी
पंख अभी बाकी है।।
मुस्कुराहटों से मेरी खुशी मत आंकना
थोड़ा रुको कुछ घाव भरना बाकी है।।
ये जो सूख कर पत्ते हैं गिरे
इस पतझड़ के बाद बहार अभी बाकी है।।
खामोशी का भले ही ये दौर हो
जश्न का शोर अभी बाकी है।।
वैसे तो वक्त ने भुला दी है हमारी यादें
बस कुछ एहसास बाकी है।।
ना उम्मीदी की हालत में
कुछ तो उम्मीद अभी बाकी है।।
चेहरे खोये हों भले ही हज़ारों
तुम्हारा मिलना अभी भी बाकी है।।
जीवन रूपी ताला ना खुला हो चाहे
बस थोड़ा सब्र करो
आखिरी चाबी अभी बाकी है ।।
No comments:
Post a Comment