ख्वाबों का सिलसिला खत्म हुआ तो
हकीकत जो मिली वो तुम हो
मेरे लिए वो परिभाषा तुम हो
अलग से चेहरों पर अंतर नहीं ढूंढ पाती आजकल
अब तो जैसे हर चेहरे में तुम हो
खुश रहने के वैसे तो बहाने बहुत हैं
मेरे होठों की वो मुस्कान तुम हो
छलक आते हैं जो आंसू अनकहे कभी भी
तुम्हारी ही याद में गालों पर लुढ़कता वो आंसू तुम हो
बातें तो सुनते हैं सब बड़ी ध्यान से
आंखों से सब पढ़ते वो तुम हो
मनमानियां तो वैसे बहुत चलती है मेरी
अपने बातों को मनवाने वाले वो सिर्फ तुम हो
मेहंदी पर अब भरोसा नहीं
हथेली पर जो रंग उतरा है वो तुम हो
मसरूफ रहती हूं इधर-उधर के कामों में मगर
कुछ भी कहो आजकल मेरा कारोबार तुम हो
मेरा एतबार तुम हो
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