ना जाने कैसा साथ है ये तुम्हारा
जमाने का सुकून दे जाते हो।।
अपलक निहारते हुए दो नैनों से
मुझमें प्यार का अथाह सागर भर देते हो।।
गालों को लाल करती मुस्कान से
सारी मेरी मुश्किलों का समाधान कर देते हो।।
हाथों की तुम्हारी वो पकड़
खोये उस आत्मविश्वास को वापिस मुझमें भर देते हो।।
होंठों की वो छुहन
मेरी रुह चूम लेते हो।।
बैचेन मुझे देखकर
बाहों में यूं भर लेते हो
पत्थर इस दिल को मोम कर देते हो।।
तुम्हारी वो आवाज़ जो अंतर्मन को मेरे भेद जाती है
लेके जुबां पर नाम मेरा
मेरे दिल के तार छेड़ देते हो।।
जमाने का सुकून दे जाते हो।।
अपलक निहारते हुए दो नैनों से
मुझमें प्यार का अथाह सागर भर देते हो।।
गालों को लाल करती मुस्कान से
सारी मेरी मुश्किलों का समाधान कर देते हो।।
हाथों की तुम्हारी वो पकड़
खोये उस आत्मविश्वास को वापिस मुझमें भर देते हो।।
होंठों की वो छुहन
मेरी रुह चूम लेते हो।।
बैचेन मुझे देखकर
बाहों में यूं भर लेते हो
पत्थर इस दिल को मोम कर देते हो।।
तुम्हारी वो आवाज़ जो अंतर्मन को मेरे भेद जाती है
लेके जुबां पर नाम मेरा
मेरे दिल के तार छेड़ देते हो।।