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Friday, 19 April 2019

रुह

ना जाने कैसा साथ है ये तुम्हारा
                               जमाने का सुकून दे जाते हो।।
अपलक निहारते हुए दो नैनों से
                                मुझमें प्यार का अथाह सागर भर देते हो।।
गालों को लाल करती मुस्कान से
                               सारी मेरी मुश्किलों का समाधान कर देते हो।।
हाथों की तुम्हारी वो पकड़
                       खोये उस आत्मविश्वास को वापिस मुझमें भर देते हो।।
होंठों की वो छुहन
                           मेरी रुह चूम लेते हो।।
बैचेन मुझे देखकर
                         बाहों में यूं भर लेते हो
                                        पत्थर इस दिल को मोम कर देते हो।।
तुम्हारी वो आवाज़ जो अंतर्मन को मेरे भेद जाती है
             लेके जुबां पर नाम मेरा
                                            मेरे दिल के तार छेड़ देते हो।।

Monday, 8 April 2019

पहली बारिश


दो बादल थे जो इस कदर टकराए
पहली सी बारिश दे मिट्टी जो महकाए।।

नन्हे से बच्चे बारिश का लुत्फ उठाते
पहली सी बारिश का जश्न मनाए।।

आज भीनी सी खुशबू से घर जो महका है
लगता है मां ने पकौड़े है बनाए।।

खिड़की खोल बारिश की बूंदों को
मैं भी हाथ पर महसूस कर रही
जैसे इन मोतियों को मुट्ठी भर समेट लिया जाए।।

दूर खेत की मुंडेर पर एक चेहरा आसमान को ताके है
शायद है वह एक हलवाहा
जैसे सुकून के आंसूओं संग बारिश की बूंदों को अपनी मिट्टी में है मिलाए।।

बूंदों को झट से सोखती यह मिट्टी
जैसे प्यासे को कोई पानी है पिलाए।।

खेतों की फसल जो मुरझाई रूठी थी सबसे
यह भी आज उछल-उछल कर एक दूसरे को है मनाए
नई सी कोंपलों को यह जन्म देती
शहर में हरियाली है लाए।।

कुछ ख़्वाब बाकी है

  टूटे हैं ख़्वाब अभी                          पंख अभी बाकी है।। मुस्कुराहटों से मेरी खुशी मत आंकना                       थोड़ा रुको कुछ घ...