Pages

Thursday, 4 July 2019

शिकायतें

नाराज़गी बिल्कुल जायज़ है तुम्हारी
लेकिन "तुम याद आते नहीं" ये भी तो जायज़ नहीं

इस मसरूफियत की जवाब तलबी कैसे दूं तुम्हें
कैसे तुम्हे मैं समझाऊं
के वक़्त सब तुम्हारा है बस हालात नहीं

साथ तो हर वक़्त हूं तुम्हारे
चाहे हकीक़त में या सपनों में
तरकीबें ढूंढती रहती हूं तुम्हें यकीन दिलवाने की
अभी कल ही एक हिचकी भेजी थी
पानी का घूंट पीकर जनाब ने चुप करवा दिया मेरी याद को
और कहते हो "तुम याद आते नहीं"

आगे से ऐसा नहीं होगा ये नहीं कहूंगी
तुम्हे सताऊंगी भी और मनाऊंगी भी
बस एक बात मन में गांठ बांध लो
ज़िन्दगी तुम्हारे ही नाम है अब

देर दुरुस्त तो मै तब भी आऊंगी
तुम फिक्र मत करना मगर
बस आज ये पानी का घूंट ना पीना
कुछ देर मेरी यादों से बतिया लेना

और हां दूर जाने की बात कभी मत करना
अब तो हमेशा साथ है रहना
ज़िन्दगी का आखिरी पड़ाव भी साथ तय करेंगे
एक बार फिर प्यार की दास्तां आबाद करेंगे।

6 comments:

  1. शिकायत करें भी तो किससे, एहसास की कोई आवाज़ नही होती।
    Well-done @Happiest_minds, keep it up.

    ReplyDelete
  2. शिकायतें और नाराजगी अपनों से ही करी जाती है। Perfect one @Happiest_minds

    ReplyDelete

कुछ ख़्वाब बाकी है

  टूटे हैं ख़्वाब अभी                          पंख अभी बाकी है।। मुस्कुराहटों से मेरी खुशी मत आंकना                       थोड़ा रुको कुछ घ...