तू वक्त नहीं, जरा रुक,धीरे चल
खुद को वक्त तो दे, आज नहीं तो कल
यह दुनिया रुकती नहीं किसी के जाने से, जानता हूं
यहां कोई किसी का नहीं, मानता हूं
बस तू एक बार मुड़ के तो देख
क्या पता मिल जाए किसी मसले का हल
फिर जिंदगी रहे या ना रहे, जाए किसे पता किस पल
मुरझाया क्यों है देख सूरज उग आया है, खिल
बस तू एक बार मुड़ के तो देख
क्या पता मिल जाए किसी मसले का हल
सुनसान रास्तों में झांक, कर पता क्या है सही क्या गलत
बोल दुख को गले लगाने की है क्या हिम्मत
हिम्मत है तो चल
अब क्यों रुका है मत ठहर
यही है, हां यही है तेरे सपनों का महल
खुद को वक्त तो दे, आज नहीं तो कल
यह दुनिया रुकती नहीं किसी के जाने से, जानता हूं
यहां कोई किसी का नहीं, मानता हूं
बस तू एक बार मुड़ के तो देख
क्या पता मिल जाए किसी मसले का हल
फिर जिंदगी रहे या ना रहे, जाए किसे पता किस पल
मुरझाया क्यों है देख सूरज उग आया है, खिल
बस तू एक बार मुड़ के तो देख
क्या पता मिल जाए किसी मसले का हल
सुनसान रास्तों में झांक, कर पता क्या है सही क्या गलत
बोल दुख को गले लगाने की है क्या हिम्मत
हिम्मत है तो चल
अब क्यों रुका है मत ठहर
यही है, हां यही है तेरे सपनों का महल
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