इक दफा फिर तुमसे मोहब्बत हो रही
जैसे फिर सूखी मिट्टी पर बारिश हो रही
वही एहसास, वही तड़पन, वही नशा महसूस कर रही
वक्त बदल गया पर हमारी मोहब्बत नहीं
कहते हैं दूरियां चूर कर देती है रिश्तों को
मैं दूरी में भी "हमारी" दुनिया बुनते देखा है
वैसे कहना तो आसान है मगर
हर इक पल जैसे सदियां बीत रही
अब जब भी मिलेंगे तो कैसे.......
क्या जज़्बात होंगे
गले मिलें या हाथ मिलाएं...
पहली मुलाकात जैसे फिर से दस्तक दे रही
मैं फिर वही मुस्कान हंस रही
बेसब्री से मैसेज का इंतजार कर रही
अभी फिर से फोन में नोटिफिकेशन आया है
झट से मैं तुम्हारा मैसेज टेब खोल रही
बेशक, ये तुम हो
शर्माना तो जायज है
देखो फिर पीछे से पापा की डांट पड़ रही
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