ठहरा था वक्त गमों की बरसात थी
छुपी बैठी थी खुशियां अतीत की वो बात थी
छत की मुंडेर पर चांद तारे ढुंढता मैं बेखबर
नहीं पता कि अमावस् की कालिख वो रात थी
व्यथित सा डूबा असंख्य ख्यालों में
खुद से ही आज मेरी शहमात थी
चहल पहल तो थी शहर में
बस दूर समंदर की वो लहरें शांत थी
किसी के स्पर्श से देह में सिहरन हुई....
झिलमिल आंखें लिए मैं औंधा
स्वर्ण सी दमकती वो हूर थी
कानों में गूंजती उसकी सौम्य ध्वनि से
मुख पर हल्की मुस्कान जरूर थी
दे गई थी वो नव जीवन
धीरे से हाथ थामते हुए बोली
मैं हर वक्त तुम्हारे पास थी
यादों को समेटे निकल पड़ा मैं जीवन पथ पर
हासिल भी हुआ हर एक मुकाम
आज तकदीर जो मेरे साथ थी
छुपी बैठी थी खुशियां अतीत की वो बात थी
छत की मुंडेर पर चांद तारे ढुंढता मैं बेखबर
नहीं पता कि अमावस् की कालिख वो रात थी
व्यथित सा डूबा असंख्य ख्यालों में
खुद से ही आज मेरी शहमात थी
चहल पहल तो थी शहर में
बस दूर समंदर की वो लहरें शांत थी
किसी के स्पर्श से देह में सिहरन हुई....
झिलमिल आंखें लिए मैं औंधा
स्वर्ण सी दमकती वो हूर थी
कानों में गूंजती उसकी सौम्य ध्वनि से
मुख पर हल्की मुस्कान जरूर थी
दे गई थी वो नव जीवन
धीरे से हाथ थामते हुए बोली
मैं हर वक्त तुम्हारे पास थी
यादों को समेटे निकल पड़ा मैं जीवन पथ पर
हासिल भी हुआ हर एक मुकाम
आज तकदीर जो मेरे साथ थी
Anshu tu to sach m shyaar+writer ban gae
ReplyDelete❤️ thank you Swati pathania
ReplyDeletenic ...
ReplyDeleteThanks bhiya g
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