काश युं ना तुम मुझे जाने देते
ख़ामोशी में छुपे वो आंसू पढ़ लेते
थी अंधेरों में मैं अगर
रोशनी की धीमी सी लो जगा देते
लेकिन युं तो ना तुम मुझे जाने देते
घिरी थी कठिनाइयों में
थोड़ी देर ही सही
मेरी जगह मेरी जिंदगी तो जी लेते
ठोकर खाकर गिरी थी मैं
आखि़री बार हाथ तो मेरा थाम देते
बिन कोशिश युं तो ना मुझे जाने देते
प्यार था कभी मुझसे अगर
काश कभी मेरी भी आंखें तुम पढ़ लेते
नादान थी नहीं समझ पाई मजबूरीयां
तुम तो समझदार थे ना
जाते जाते जाने की वजह ही पूछ लेते
रिश्तों की डोर को युं ना खोल देते
काश युं ना तुम मुझे जाने देते
ख़ामोशी में छुपे वो आंसू पढ़ लेते
थी अंधेरों में मैं अगर
रोशनी की धीमी सी लो जगा देते
लेकिन युं तो ना तुम मुझे जाने देते
घिरी थी कठिनाइयों में
थोड़ी देर ही सही
मेरी जगह मेरी जिंदगी तो जी लेते
ठोकर खाकर गिरी थी मैं
आखि़री बार हाथ तो मेरा थाम देते
बिन कोशिश युं तो ना मुझे जाने देते
प्यार था कभी मुझसे अगर
काश कभी मेरी भी आंखें तुम पढ़ लेते
नादान थी नहीं समझ पाई मजबूरीयां
तुम तो समझदार थे ना
जाते जाते जाने की वजह ही पूछ लेते
रिश्तों की डोर को युं ना खोल देते
काश युं ना तुम मुझे जाने देते
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