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Saturday, 28 April 2018

बारिश

आज वो भी अपना शहर छोड़ आई है
                                              संग अपने बस आंसू ही लाई है
उसके लिए मुश्किल तो है मगर
                                       ना जाने कितने चेहरों पर खुशी छाई है
आज इतने दिनों बाद बारिश जो आई है
                                                 संसार को ताजा करने आई है
मस्ती करती धूल मिट्टी को चुप कराने आई है
                  खुद के गमों को भुलाकर दुसरों को खुशियां बांटने आई है
समंदर में सीप का मोती बनने आई है
                        या धरती में उस नन्हे बीज को अंकुरित करने आई है
आज बस एक मुकाम बनाने आई है
                                           आज वो भी अपना शहर छोड़ आई है
कितने दिनों बाद आज बारिश जो आई है

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