अक्सर भूल जाया करती हुं खुद को
वो याद दिला दिया करता है
उतर जाता है चेहरा जब उदासी से
एक मुस्कान भर दिया करता है।।
चाहे मेरा दुख हो या उसका सुख
वो सब आधा आधा बांट दिया करता है
वैसे तो बहुत कारण हैं दुखी रहने के
वो हर रोज खुशी की एक वजह बता दिया करता है।।
शब्दों के जंजाल से परे
वो मेरी खामोशियां सुन लिया करता है
सीप सा मेरी आंखों के आंसू को
मोती में बदल दिया करता है।।
बिना पर के इस पंछी में भी
उडा़न भर दिया करता है
उलझन में घिरी होती हूं जब
चुटकी में सब सुलझा दिया करता है
कहीं जगह मिले ना मिले
दिल में घर बना लिया करता है ।।
वो याद दिला दिया करता है
उतर जाता है चेहरा जब उदासी से
एक मुस्कान भर दिया करता है।।
चाहे मेरा दुख हो या उसका सुख
वो सब आधा आधा बांट दिया करता है
वैसे तो बहुत कारण हैं दुखी रहने के
वो हर रोज खुशी की एक वजह बता दिया करता है।।
शब्दों के जंजाल से परे
वो मेरी खामोशियां सुन लिया करता है
सीप सा मेरी आंखों के आंसू को
मोती में बदल दिया करता है।।
बिना पर के इस पंछी में भी
उडा़न भर दिया करता है
उलझन में घिरी होती हूं जब
चुटकी में सब सुलझा दिया करता है
कहीं जगह मिले ना मिले
दिल में घर बना लिया करता है ।।
Powerful & heartfelt poem my friend. Straight from the soul❤️
ReplyDeleteThank you
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