सब बदल देता है ये वक्त
चेहरे भी जज्बात भी
जमाने में खुशियां कम पड़ जाती है लेकिन
नहीं पड़ती कम गमों की बरसात भी
करोड़ों की आबादी में सही इंसान कैसे ढूंढे
यहां हजारों में है बिकता ईमान भी
गैरों से शिकवा क्यों करें
जब गिराने वाले हो अपने ही
ये अहं भी इक दिन ढल जाएगा
साथ देने वाला भी साथ छोड़ जाएगा
ठीक वैसे जैसे दिन ढलने के बाद रोशनी
अमावस की रात चांद तारे
ढुंढते रह जाओगे
पर अब नहीं मिलेगी तुम्हें अपनी ही परछाई भी
Awesome lines 👌
ReplyDeleteThank u
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