वसंतो में किसी रोज फूल थे जो खिले
सूखे पड़े दिमक खाती उन किताबों में मिले
ख्वाबों सा था वो मंजर, टूटा तो पता चला
आंखों पे ठहरे आंसू गालों पर मिले
यादों की किताब के पन्ने खुद पलट रहें हो जैसे
कुछ थे जो हवा से गले लगाते हुए मिले
चाह थी समेट लूं इन्हें अपने दिल में
लेकिन ये दिल में जैसे सुई चुभाते हुए मिले
नहीं है अब वो दुनिया में मेरी
फिर भी लबों पर उनका नाम गाते हुए मिले
सूखे पड़े दिमक खाती उन किताबों में मिले
ख्वाबों सा था वो मंजर, टूटा तो पता चला
आंखों पे ठहरे आंसू गालों पर मिले
यादों की किताब के पन्ने खुद पलट रहें हो जैसे
कुछ थे जो हवा से गले लगाते हुए मिले
चाह थी समेट लूं इन्हें अपने दिल में
लेकिन ये दिल में जैसे सुई चुभाते हुए मिले
नहीं है अब वो दुनिया में मेरी
फिर भी लबों पर उनका नाम गाते हुए मिले
Teri soch k liye teko 👑 yeh milna chahiye or tere liye meri trph से 😘 yeh
ReplyDeleteHehe 😊😊😊 thanks
ReplyDeletebhut khub
ReplyDeleteThanks brother 😊
DeleteKya bat
ReplyDeletegreat😇
ReplyDeleteThanks 😊
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